कहानियां कहानियां, BoodleBobs, राज एक चलता फिरता रेडियेटर

कहानियां कहानियां राज एक चलता फिरता रेडियेटर - बच्चों की कहानी - पुस्तक 01

 

कहानियां कहानियां - बच्चों की कहानी जिसका नाम है राज

यह बच्चों की लघु कहानी राज के बारे में है। और हाँ, वह एक रेडिएटर है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कितनी गर्मी है। राज के लिए कभी गर्मी ज्यादा नहीं हो सकती - तो अच्छा ही था कि वह एक रेडिएटर था।
“मुझे गीले तौलिये ला कर दो!” उसने बड़े कमरे के पार से कहा। “मुझे अपने गीले, धुले हुए कपड़े और मोज़े ला कर दो!” जो भी गीला... नमी वाला... या पूरी तरह भीगा हुआ था... राज से प्यार करता था।

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राज एक चलता फिरता रेडियेटर EP-01 - जो केम्प द्वारा 

बच्चों की कहानियां कहानियां - यह कहानी राज के बारे में है, और हाँ, वह एक रेडिएटर है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि कितनी गर्मी है। राज के लिए कभी गर्मी

ज्यादा नहीं हो सकती। तो अच्छा ही था कि वह एक रेडिएटर था।

"मुझे गीले तौलिये ला कर दो", उसने बड़े कमरे के पार से कहा।

"मुझे अपने गीले, धुले हुए कपड़े और मोज़े ला कर दो।"

जो भी गीला, नमी वाला या पूरी तरह भीगा हुआ था, राज से प्यार करता था

और उसके ऊपर एक और को रखने की हमेशा जगह रहती थी।

उसका दोस्त टिम्मी बाहर रस्सी पर लटक रहा था और जम गया था।

"मुझे लगता है मुझे......

.

आच्छू! जुकाम हो गया", वह छींका।

"यहाँ आकर मेरे सिर पर बैठ जाओ, जब तक मैं तुम्हारे जुकाम के लिए थोड़ी

शहद ढूंढता हूँ", राज ने उदारता से कहा

और टिम्मी को अपने सिर पर बैठा कर वे बगीचे में गए।

"मुझे थोड़ा शहद चाहिए", उसने पुकारा। और बड़ी मोटी मक्खी आकर उसके पास

उतर गई।

"मेरे पीछे आओ", बड़ी मोटी मक्खी ने कहा और राज को बुरंश की झाड़ी की तरफ

ले गई।

इसे कहते हैं बु रं श

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बज़्ज़्ज़्ज़्ज़ - "बस यहाँ रुको", वह

भिनभिनाई। "जितनी जल्दी हो सके

मैं वापस आती हूँ।"

राज इंतजार करने के लिए बैठा ही था कि दो लंबी गुलाबी

लकड़ियाँ आकर उसके सामने टिक गईं।

"ओह! मुझे कैद कर लिया गया है", वह घबराकर बोला। "मैं कैदी बन गया",

और उसने लकड़ियों को जितनी जोर से हो सकता था, हिलाया

"नहीं, ऐसा नहीं है", एक बड़े से गुलाबी सिर ने नीचे आकर कहा।

तुम बस एक टाँग हिला रहे हो। वैसे एक नहीं, दो। अरे! मेरी!"

वे टाँगें पीछे हट गईं और गुलाबी फेडोरा नजर के सामने आ गई। "अरे, क्या तुमने मेरे

अंडे को देखा है?" उसने पूछा।

राज को समझ नहीं आया कि वह क्या कहे। "तुम्हारा अंडा!" उसने हैरान होकर कहा। "नहीं,

माफ करना, मैंने नहीं देखा।"

"यह तो बहुत बुरा है", गुलाबी फेडोरा बोली। "अचानक से वह लुढ़क कर चला गया, और

अगर वह ठंडा हो गया!"

"ठंडा, ठंडा!" राज ने भौंचक्का हो कर कहा। "नहीं। नहीं, हम ऐसा नहीं होने दे सकते। चलो,

हमें जल्दी से जाकर उसे ढूंढना चाहिए।"

उसी समय बड़ी मोटी मक्खी वापस आ गई और वह जानना चाहती थी कि यह सब क्या

हो रहा है। "वह एक बड़ा नीला अंडा है!" फेडोरा ने समझाया। "पर कृपया जल्दी करो। वह

ठंडा नहीं हो सकता", राज ने कहा।

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"अरे, मैं अपने दल को इकट्ठा करती हूँ", बड़ी मोटी मक्खी ने अपने मित्रों को

बुलाते हुए कहा, जो जल्दी ही पूरे बगीचे के ऊपर इधर-उधर उड़ने लगे।

उन्हें खोया हुआ अंडा ढूंढने में ज्यादा देर नहीं लगी। मगर एक समस्या थी।

अंडे के साथ बैठा था रैटी, और उसके दिमाग में एक ही चीज थी- नाश्ता, और

एक प्यारा सा बड़ा नीला अंडा तो बहुत बढ़िया रहेगा। "अरे नहीं!" राज चिल्लाया,

और फिर तेजी से दिमाग चलाते हुए उसने टिम्मी को पकड़ कर गोल-गोल घुमाया

और झटक दिया।

"आह!" चूहा चिल्लाया। "ओह! ओह! ऊह!" टिम्मी चिल्लाया। "ओह, सचमुच बहुत दर्द

हुआ।" वे दोनों एक साथ चिल्लाए, मगर इससे काम बन गया।

रैटी नाश्ते के बारे में भूल गया और उसने सोचा कि भलाई यहाँ से भाग जाने में

ही है।

गुलाबी फेडोरा ने प्यार से अपने अंडे को सहलाया।

"यह तो अभी भी गर्म है", उसने चैन की सांस ली। "परंतु इसे और गर्म होना चाहिए",

राज ने कहा।

"टिम्मी , क्या तुम मदद कर सकते हो?" टिम्मी मदद करने में खुश था। उसने

अपने आप को प्यार से अंडे के आसपास लपेट लिया और राज ने उन दोनों को

अपने सपाट, गरम सिर पर बैठा लिया।

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वे इंतजार करते रहे, और करते रहे, जब तक एक छोटी सी दरार नहीं दिखने लगी,

और अचानक से एक नन्हा सा गुलाबी राजहंस बाहर आ गया।

"मम्मा!" उसने एक आश्चर्यजनक गहरी आवाज में पुकारा और अपने छोटे-छोटे पंख

राज के आसपास लपेट दिए।

"पापा!" वह हंसकर बोली, और फिर ऊपर देख कर अपनी मम्मी की गुलाबी लंबाई

को कस कर पकड़ लिया।

जहाँ भी राज जाता

उसके पीछे-पीछे एक फ्लोरा नाम की नन्ही गुलाबी राजहंस अपनी चोंच में

टिम्मी को पकड़े चलती रहती।

और जहाँ भी फ्लोरा जाती, गुलाबी फेडोरा भी पीछे-पीछे जाती।

"मुझे लगता है हम एक खुश परिवार हैं", राज संतोषपूर्वक मुस्कुराया

और अपनी गर्माहट बिखेर दी।

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